अयोध्या में श्रीराम लला की प्राण प्रतिष्ठा के लिए माता सीता के मायके से जल और फल भेजे गए हैं।
नेपाल की दस नदियों के पवित्र जल से अयोध्या में रामलला का जलाभिषेक किया जाएगा। रविवार को राम नाम के जयकारे के साथ जल और फल लेकर जत्थे अयोध्या के लिए रवाना हो गए।
प्राण प्रतिष्ठा के इस कार्यक्रम के लिए नेपाल के 15 प्रमुख धर्माचार्यों को विशेष तौर पर निमंत्रण मिला है।
अयोध्या में 22 जनवरी को राम मंदिर के प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम को लेकर भारत की तरह पड़ोसी देश नेपाल में भी भारी उत्साह है।
कंचनपुर के रमेश प्रसाद भट्ट और दिली राज पंत ने बताया कि नेपाल के विश्व हिंदू महासंघ और राष्ट्रीय प्रजातंत्र पार्टी के अलावा तमाम हिंदू संगठन के लोग रविवार को अयोध्या की ओर निकलेंगे।
विश्व हिंदू महासंघ के प्रमुख सम्राट सिंह ने बताया कि 22 जनवरी के कार्यक्रम में नेपाल के काठमांडू के अलावा पोखरा और कंचनपुर जिले से भी लोग जा रहे हैं।
कहा कि सीतामाता का जन्म स्थान नेपाल के जनकपुरी में रहा है। कंचनपुर के एमपी जोशी ने कहा कि यहां पर हिंदुओं की रैली निकलेगी और दिवाली जलाएंगे।
इन नदियों से पवित्र जल अयोध्या पहुंचेगा
नेपाल की पवित्र बागमती, नारायणी, दूधमती, कालीगंडकी, कोशी, कमला, देवघाट, महाकाली (शारदा) आदि नदियों के जल का उपयोग भगवान राम के जलाभिषेक के लिए अयोध्या पहुंचेगा।
फलों की टोकरियां वाया गोरखपुर अयोध्या पहुंची
नेपाल के जनकपुरी स्थित जानकी मंदिर के सह महंत रामरोशन दास वैष्णव ने बताया कि राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा के लिए सीता के मायके जनकपुरधाम से 1100 फलों की टोकरी को शगुन के तौर पर अयोध्या भेजी जा रही है।
जनकपुरधाम से जलेश्वर नाथ, मलंगवा, सिमरौनगढ़, गढ़ीमाई, बीरगंज से बेतिया, कुशीनगर, सिद्धार्थनगर गोरखपुर होते हुए अयोध्या पहुंचने का कार्यक्रम तय है। जनकपुर के जानकी मंदिर के दो महंत अयोध्या गए हैं।
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