नीट-यूजी पेपर लीक मामले में सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में फिर से सुनवाई हुई।
इससे पहले अदालत ने गुरुवार को आदेश दिया था कि शनिवार तक सेंटर और शहर के अनुसार नीट का रिजल्ट ऑनलाइन जारी किया जाए।
अदालत के आदेश पर शनिवार को यह रिजल्ट भी जारी कर दिया गया था।
अब इस मामले में सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा, ‘आरोपियों के बयान यह संकेत देते हैं कि कुछ छात्र 4 मई को जुटे थे और उन्होंने जवाब याद
किए थे। इसका मतलब है कि 4 मई से पहले नीट का पेपर लीक हुआ था।’
शीर्ष अदालत ने कहा कि यह सही है कि प्रश्न पत्र ई-रिक्शा से ले जाए गए। लेकिन एक बात ध्यान देने वाली है कि जो तस्वीर शेयर की गई, वह प्रश्न पत्र की नहीं बल्कि ओएमआर शीट की थी।
वहीं याचिकाकर्ता छात्रों के वकील नरेंद्र हुड्डा ने कहा कि बिहार पुलिस की जांच में यह माना गया है कि पेपर लीक तो हुआ था। यह पेपर लीक प्रश्न पत्रों को संबंधित बैंकों में जमा कराने से पहले हुआ था।
याचिकाकर्ताओं ने कहा कि एनटीए ने खुद भी पेपर लीक की बात स्वीकार की ही थी। इसके अलावा नए सिरे से जारी रिजल्ट पर भी वकील ने सवाल उठाया।
याचिकाकर्ताओं के वकील ने कहा कि रिजल्ट में ऑल इंडिया रैंक का जिक्र नहीं है। इसके अलावा सेंटर का नंबर भी नहीं है। चीफ जस्टिस ने इस दौरान सरकारी वकील से पूछा कि सेंटर और शहर के अनुसार डेटा से क्या पता चलता है।
याचियों के वकील ने कहा कि हरियाणा के झज्जर स्थित हरदयाल स्कूल के प्रिंसिल एसबीआई और कैनरा बैंक गए थे और वहां से प्रश्न पत्र लिए।
कैनरा बैंक से लाए पेपरों को बांटा गया, लेकिन एसबीआई वाले पेपर दिए जाने थे। इस पर चीफ जस्टिस ने पूछा कि आखिर झज्जर के सेंट्रर प्रभारी कैनरा बैंक कैसे गए, जब एसबीई के पेपर बांटे जाने थे।
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