एडीआर की तरफ से सोमवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में जारी किए विश्लेषण के अनुसार, हाल ही में हुए लोकसभा चुनावों में गिने गए कुल 5 लाख 54 हजार 598 वोट 362 संसदीय क्षेत्रों में डाले गए वोटों से कम हैं, जबकि 176 संसदीय क्षेत्रों में डाले गए वोटों से 35 हजार 093 वोट अधिक गिने गए हैं। हालांकि इस मामले पर चुनाव आयोग की प्रतिक्रिया का इंतजार है।
एडीआर के संस्थापक ने उठाए सवाल
इस मामले में एडीआर के संस्थापक जगदीप चोकर ने प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए कहा, इसके अलावा, अंतिम मतदाता मतदान आंकड़ों जारी करने में जरूरत से ज्यादा देरी, अलग-अलग निर्वाचन क्षेत्र और मतदान केंद्र के आंकड़ों का अभाव और चुनाव परिणाम अंतिम मिलान किए गए आंकड़ों के आधार पर घोषित किए गए थे या नहीं, इसने चुनाव परिणामों की शुद्धता के बारे में चिंता और सार्वजनिक संदेह पैदा किया है। हालांकि, एडीआर ने यह स्पष्ट नहीं किया कि कितनी सीटों पर वोटों के इस अंतर के कारण अलग परिणाम सामने आते।
एडीआर ने रिपोर्ट गिनवाए कई अहम बिंदु
एडीआर की रिपोर्ट में कहा गया है कि चुनाव आयोग अब तक वोटों की गिनती, ईवीएम में डाले गए वोटों में अंतर, मतदान में बढ़ोत्तरी, डाले गए वोटों की संख्या का खुलासा न करना, डाले गए वोटों के आंकड़ों को जारी करने में अनुचित देरी और अपनी वेबसाइट से कुछ आंकड़े को साफ करने के बारे में अंतिम और प्रामाणिक आंकड़ा जारी करने से पहले चुनाव परिणाम घोषित करने में कोई उचित स्पष्टीकरण देने में विफल रहा है।
इन पांच लोकसभा क्षेत्रों में नहीं थी गड़बड़ी
एडीआर की रिपोर्ट में कहा गया है कि आम चुनाव 2024 के नतीजों की घोषणा करते समय डाले गए और गिने गए मतों में अमरेली, अत्तिंगल, लक्षद्वीप और दादरा नगर हवेली और दमन दीव को छोड़कर 538 संसदीय क्षेत्रों में भारी गड़बड़ी सामने आईं। हालांकि सूरत निर्वाचन क्षेत्र निर्विरोध था। इसलिए 538 लोकसभा क्षेत्रों में कुल 5 लाख 89 हजार 691 वोट की गड़बड़ियां हैं।
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