तिरुपति बालाजी में लड्डू प्रसाद विवाद ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं. हालांकि, मंदिर की शुद्धता को लेकर जप, हवन और शुद्धिकरण किया गया, ताकि मंदिर में पवित्रता बनी रहे. इसके लिए 23 सितंबर को मंदिर के तीर्थ पुरोहित द्वारा महाशांति होम किया गया और पंचगव्य से मंदिर को शुद्ध किया गया.
वहीं, लोगों के मन में अब ये सवाल भी आ रहा है कि जब बाजार की मिलावटी चीजों के कारण तिरुपति मंदिर में ऐसा हो सकता है तो फिर घर का मंदिर कैसे बचा रहेगा? अगर घर का मंदिर भी किसी कारण अशुद्ध हो जाए तब क्या करें? इस दुविधा को देवघर के आचार्य ने दूर करने की कोशिश की है. आइए जानते हैं उनसे उपाय…
भगवान के भोग का रखें ध्यान
देवघर बाबा बैद्यनाथ मंदिर के प्रसिद्ध तीर्थ पुरोहित प्रमोद श्रृंगारी ने लोकल 18 को बताया कि तिरुपति बालाजी मंदिर की घटना ने श्रद्धालुओं की भावना को ठेस पहुंचाया है. भगवान को कोई भी चीज अर्पण हो उसमें बहुत पवित्रता होनी चाहिए. उसमें से भी गाय की चीजें अर्पण करने का विधान है जैसे दूध, दही, घी इत्यादि. इनसे बने हुए पकवान का ही भोग लगाना चाहिए. उसमें से घी के अर्पण का विशेष महत्व बतलाया गया है. इसलिए इसकी पवित्रता और शुद्धता पर ध्यान रखना चाहिए. अगर कोई भी मंदिर या वहां का प्रसाद दूषित हो जाए तो महा शांति होम और पंचगव्य से शुद्धता की जा सकती है.
क्या है पंचगव्य और महाशान्ति होम
तीर्थ पुरोहित प्रमोद श्रृंगारी ने बताया कि अगर किसी मंदिर या घर की शुद्धता या पवित्रता नष्ट हो जाए तो महाशांति हवन कराया जाता है. साथ ही पंचगव्य से शुद्धता की जाती है यानी फिर से गाय के ही दूध, दही, घी, गोबर और गोमूत्र से पूरे मंदिर को शुद्ध किया जाता है. जैसे किसी के घर में कुछ अपवित्रता हो गई तो पंचगव्य के द्वारा ही घर को शुद्ध किया जा सकता है.
घर के मंदिर को कैसे करें शुद्ध
जब भी कभी जातक को ऐसा लगे कि उनके घर का मंदिर अशुद्ध हो चुका है तो पंडितों के द्वारा महा शांति हवन कराएं. महाशांति हवन का अर्थ है किसी भी स्थान को साफ करने के लिए उसका मंत्रों से शुद्धिकरण करना. महाशांति हवन के दौरान कई मंत्रों का जाप किया जाता है. महा शांति हवन के बाद पंचगव्य से मंदिर को शुद्ध कर सकते हैं.
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