भोपाल । दुनिया के सबसे बड़े राजनीतिक दल भाजपा की मप्र इकाई संगठन की दृष्टि से सबसे बेहतर मानी जाती है। प्रधानमंत्री मोदी से लेकर पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष कई बार खुले मंच से मप्र भाजपा संगठन की तारीफ कर चुके हैं। भाजपा के इतिहास में पहली बार मप्र में सगठन चुनाव की प्रक्रिया पर पार्टी के भीतर ही सवाल उठ रहे हैं। मंडल अध्यक्षों के निर्वाचन को लेकर लगभग सभी संगठनात्मक जिलों से शिकायतें प्रदेश नेतृत्व एवं चुनाव समिति तक पहुंची हैं। यही वजह कि चुनाव अधिकारियों ने कई मंडल अध्यक्षों के चुनाव को शून्य किया है। जबकि 200 से ज्यादा मंडलों को होल्ड पर रखा गया है।मंडल अध्यक्षों के चुनाव को लेकर पार्टी के भीतर उपजे विवाद के बाद प्रदेश नेतृत्व ने सोमवार को बड़ी बैठक की है। हालांकि बैठक में जिलाध्यक्षों के निर्वाचन पर चर्चा हुई है। जिसके तहत 30 दिसंबर तक सभी जिलाध्यक्षों का निर्वाचन होना है। जबकि मंडल अध्यक्षों के चुनाव पर जो आपत्तियां आईं है, उन पर चुनाव समिति तथ्यों की पड़ताल कर रही है। जिसके आधार पर प्रदेश चुनाव प्रभारी अंतिम निर्णय लेेंगे। ज्यादातर आपत्तियां ज्यादा उम्र के कार्यकर्ता, पिछले चुनावों में पार्टी प्रत्याशियों के साथ भितरघात करने वाले और विवादित छवि के लोगों को मंडल अध्यक्ष बनाने को लेकर हैं।
कई चुनाव अधिकारियों पर लगे आरोप
पार्टी ने संगठन चुनाव कराने के लिए हर जिले में चुनाव अधिकारी नियुक्त किए हैं। कुछ चुनाव अधिकारियों के खिलाफ भी मंडल अध्यक्षों के चुनाव में गड़बड़ी करने की शिकायत प्रदेश नेतृत्व तक पहुंची हैं।
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