भोपाल । कुछ वर्ष पूर्व भोपाल इंदौर एक्सप्रेस वे की योजना बनाई गई थी, जो ठण्डे बस्ती में चली गई, मगर अब नेशनल हाईवे नए सिर से इसकी तैयारी शुरू की है और डीपीआर बनाने के लिए उपयुक्त फर्म का चयन करने हेतु टेंडर भी जारी किए हैं। दरअसल अभी भोपाल में जो आयकर और लोकायुक्त के छापे पड़े हैं, उसमें यह आरोप लगा कि पश्चिमी बायपास प्रोजेक्ट के चलते अफसरों, नेताओं और मंत्रियों और बिल्डिरों ने मजीनों कीबड़े पैमाने पर खरीद फरोख्त की है, जिसके चलते अब मंडीदीप से भोपाल इन्दौर होते हुए जो पश्चिमी बायपास प्रोजेक्ट अमल में लाया जाना था, वह खटाई में पड़ गया है। अभी जो कार्रवाई इन्दौर, भोपाल और अन्य स्थानों पर छापों की हुई है, उसमें एक बड़ा आरोप यह लग रहा है कि भोपाल के पश्चिमी बायपास में जमीन अधिग्रहण और प्रोजेक्ट के लिए जो एरिया चिन्हित किए गए, वहां पर अफसरों, नेताओं के साथ बिल्डरों ने बड़ी मात्रा में जमीनें खरीद ली और रोड बनाने का प्रोजेक्ट लाया भी इसीलिए गया। यहां तक कि भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्वी मंत्री दीपक जोशी ने भी जो पीएमओ को पत्र लिखा, उसमें इसी पश्चिम बायपास परियोजना के नाम पर हुए घोटाले के आरोप लगाए और उसके बाद ही छापे की यह कार्रवाई शुरू हुई। लिहाजा अब तीन हजार करोड़ रुपए का यह प्रोजेक्ट ठंडे बस्ते में जाने की चर्चा है। अब तीन हजार करोड़ रुपए का यह प्रोजेक्ट में मंडीदीप से इन्दौर को जोडऩे वाले पश्चिमी बायपास के रूप में अमल में लाना था और 41 किमी लंबे इस प्रोजेक्ट को लेकर गंभीर आरोप लगे हैं, जिसमें 600 एकड़ से अधिक जमीनों का अधिग्रहण भी किया जाना है।
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