वास्तु शास्त्र में बच्चों से जुड़े कई उपाय बताए गए हैं. घर में वास्तु दोष का प्रभाव बच्चों की पढ़ाई पर भी पढ़ता है. अक्सर माता-पिता की यह शिकायत होती है कि बच्चे उनका कहना नहीं मानते. ऐसे में वे सबसे पहले उनके सोने एवं पढ़ने का कमरा चेक करें कि वह किस दिशा में है. जानें वास्तु शास्त्र में वर्णित कुछ आसान उपाय, जिन्हें अपनाकर आप अपने बच्चों का भविष्य सुधार सकते हैं. बच्चे का मन पढ़ाई में न लगने की वजह वास्तु दोष भी हो सकता है.
वास्तु के मुताबिक, घर में वास्तु दोष होने से नकारात्मकता बढ़ती है और इससे पढ़ाई में मन नहीं लग पाता. इसी कारण बच्चे पढ़ाई में अच्छा परफॉर्म भी नहीं कर पाते हैं. घर में वास्तु दोष होने की वजह से भी बच्चे के मन की एकाग्रता खत्म हो जाती है. वह पढ़ाई करते समय बहुत जल्दी बोर हो जाते हैं. वास्तु के कुछ उपाय अपनाकर बच्चों के पढ़ाई में मन लगाया जा सकता है:
घर के दक्षिण-पश्चिम कोण की सकारात्मक ऊर्जा बढ़ाने के लिए असली स्फटिक के दो गोलों का इस्तेमाल करें. इन्हें प्रयोग करने से पहले एक हफ्ते तक नमक के पानी में रखें. उसके बाद धोकर कांच की प्लेट में रखें. इन्हें धूप में तीन घंटे रखकर दोबारा घर के अंदर रख दें.
बच्चों का स्टडी रूम पूर्व या उत्तर-पूर्व दिशा में होना चाहिए.
स्टडी टेबल का मुंह पूर्व या उत्तर दिशा की ओर होना चाहिए.
स्टडी टेबल पर ढेर सारी किताबें न रखें.
स्टडी टेबल पर पूर्व की ओर देवी सरस्वती की तस्वीर रखें.
स्टडी टेबल पर एक क्रिस्टल का ग्लोब भी रख सकते हैं.
स्टडी रूम में जूते-चप्पल नहीं रखना चाहिए.
स्टडी रूम में भरपूर रोशनी होनी चाहिए.
स्टडी रूम में बेकार की चीज़ें जैसे टीवी, मैगज़ीन, सीडी प्लेयर, वीडियो गेम, कबाड़ आदि न रखें.
स्टडी रूम में हल्के रंग का कलर करवाना चाहिए.
स्टडी रूम में मोबाइल, लैपटॉप आदि समान नहीं रखना चाहिए.
स्टडी रूम में मेज कभी भी कोने में नहीं होनी चाहिए.
स्टडी रूम में लाइट पीछे से आनी चाहिए.
बच्चों के स्टडी रूम में मोमबत्ती लगाना चाहिए. इससे उनका मन पढ़ाई की ओर केंद्रित होगा.
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