रायपुर: प्रधानमंत्री आवास योजना ने माओवादी प्रभावित क्षेत्रों में भी नई उम्मीद और आजादी का अहसास जगाया है। बीजापुर जिले की जनपद पंचायत उसूर की ग्राम पंचायत तर्रेम के आश्रित गांव चुटवाही की 50 वर्षीय महिला श्रीमती हुंगी इसका सशक्त उदाहरण हैं। यह गांव छत्तीसगढ़ सरकार की नियद नेल्ला नार योजना में शामिल है। इस गांव के लोग वर्षों से माओवादी भय और आतंक के साये में जीवन जी रहे थे, इस गांव में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत श्रीमती हुंगी का पक्का मकान बनकर तैयार हो गया है, जो गांव का पहला प्रधानमंत्री आवास है।

सुरक्षा शिविर स्थापित होने के बाद गांव में धीरे-धीरे माओवाद का प्रभाव कम हुआ। वित्तीय वर्ष 2024-25 में ग्राम पंचायत के माध्यम से प्रधानमंत्री आवास योजना की जानकारी ग्रामीणों तक पहुँची। प्रारंभ में ग्रामीण भयवश आवास निर्माण के लिए आगे नहीं आ रहे थे, लेकिन श्रीमती हुंगी ने हिम्मत जुटाई। उन्हें रूरल मेसन कार्यक्रम के अंतर्गत रानी मिस्त्री प्रशिक्षण की जानकारी मिली, जिसके माध्यम से वे अपने घर का निर्माण करते हुए राजमिस्त्री का हुनर भी सीख रही हैं।
श्रीमती हुंगी ने बताया कि माओवाद के डर के कारण आज तक गांव में कोई भी पक्का घर नहीं बन पाया था। अब उनका आवास गांव का पहला पक्का मकान बनकर तैयार हो चुका है। उन्होंने शासन और प्रशासन का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री आवास योजना गरीब परिवारों के लिए वरदान है।
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