नई दिल्ली । एनडीए के नए गठबंधन सहयोगियों की ओर से अग्निपथ योजना के बारे में चिंता जताने से पहले ही मोदी सरकार ने संकेत दिया था कि भर्ती प्रक्रिया में बदलाव हो सकता है। वरिष्ठ नेताओं ने माना कि शॉर्ट सर्विस सैनिकों के लिए रोजगार के मौके बढ़ाने और नौकरी में आरक्षण प्रदान करने के लिए संशोधन हो सकता हैं। दरअसल राजनीतिक विरोध के अलावा, सशस्त्र बलों के भीतर योजना को लागू करना आसान नहीं रहा है। विशेष रूप से अनुभवी समुदाय सैनिकों के एक अलग वर्ग के निर्माण के बारे में मुखर रहा है, जिनके पास नियमित कर्मियों को दी जाने वाली सुरक्षा और वित्तीय सुरक्षा का अभाव है
सशस्त्र बलों को वर्तमान में 1.5 लाख से अधिक जवानों की कमी का सामना करना पड़ रहा है, इसमें अधिकांश सेना के ही हैं। यह अंतर इसकारण बढ़ा हैं, क्योंकि अग्निपथ योजना के कारण सैनिकों की नियमित भर्ती रोक दी गई है। प्रशिक्षण क्षमता की कमी और सालाना भर्ती लिमिट के कारण कमी को जल्द ही दूर करना चुनौतीपूर्ण है।
फिलहाल, योजना यह है कि सेना में केवल 25 फीसदी अग्निवीरों को ही नियमित सैनिक के रूप में रखा जाए। बाकी जवानों को सेना छोड़ने पर पूर्व-निर्धारित वित्तीय पैकेज दिया जाएगा। हालांकि, सरकार सशस्त्र बलों की जरूरतों के आधार पर इस भर्ती को बढ़ाने के लिए तैयार है। इससे यह संभावना बढ़ जाती है कि 2026 के अंत में जब पहला बैच अपना कार्यकाल पूरा कर लेगा, तब लगभग सभी अग्निवीरों को नियमित सर्विस के लिए रखा जा सकता है।
वहीं एक और विवादास्पद मुद्दा युद्ध में घायल या शहीद सैनिकों को दी जाने वाली वित्तीय सुरक्षा है। सैनिकों को सशस्त्र बलों में शामिल करने की योजना चाहे जो भी हो, युद्ध में हताहत होने पर मिलने वाले बेनिफिट में समानता सुनिश्चित करने की मांग की गई है।
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