रायपुर: कभी नक्सल गतिविधियों के कारण विकास की मुख्यधारा से दूर रहा कोयलीबेड़ा विकासखंड का ग्राम हेटारकसा अब तेजी से बदल रहा है। जहां पहले बुनियादी सुविधाओं तक पहुंच मुश्किल थी, वहीं अब शासन की योजनाओं और सुरक्षा माहौल में सुधार के चलते गांव में विकास के नए आयाम दिखाई दे रहे हैं।
वर्षों तक नक्सल प्रभाव और दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों के कारण इस क्षेत्र में योजनाओं का क्रियान्वयन चुनौतीपूर्ण बना रहा। पेयजल जैसी बुनियादी सुविधा भी ग्रामीणों के लिए बड़ी समस्या थी। गांव के लोग कुओं और नालों पर निर्भर थे, जिससे खासकर गर्मी के मौसम में पानी की किल्लत और बढ़ जाती थी।
अब केंद्र सरकार की जल जीवन मिशन और राज्य शासन के समन्वित प्रयासों से स्थिति में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। ग्राम हेटारकसा के 63 घरों तक नल कनेक्शन पहुंचाए गए हैं। दो सोलर पंप आधारित जल टंकियों के माध्यम से प्रत्येक घर में नियमित रूप से स्वच्छ पेयजल की आपूर्ति सुनिश्चित की जा रही है।

गांव के निवासी राजनाथ पोटाई बताते हैं कि पहले पानी लाने के लिए दूर-दराज तक जाना पड़ता था, जिससे समय और श्रम दोनों अधिक लगता था। अब घर पर ही पानी उपलब्ध होने से दैनिक जीवन काफी सहज हो गया है। वहीं, ग्रामीण महिला सविता बेन के अनुसार, पहले दिन का बड़ा हिस्सा पानी की व्यवस्था में ही खर्च हो जाता था, लेकिन अब नल-जल सुविधा से उन्हें राहत मिली है और वे अन्य कार्यों पर ध्यान दे पा रही हैं।
स्वच्छ पेयजल की उपलब्धता का सकारात्मक प्रभाव स्वास्थ्य पर भी देखा जा रहा है। जलजनित बीमारियों में कमी आई है। साथ ही, ग्रामीण घरों के आसपास सब्जी उत्पादन भी कर रहे हैं, जिससे पोषण स्तर में सुधार के साथ अतिरिक्त आय के अवसर भी बढ़े हैं।
नक्सल प्रभावित इस दूरस्थ क्षेत्र में योजनाओं का सफल क्रियान्वयन प्रशासन के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय एवं जिला प्रशासन के प्रति आभार व्यक्त किया है। ग्राम हेटारकसा की यह बदली हुई तस्वीर दर्शाती है कि सुरक्षा, विश्वास और विकास के समन्वित प्रयासों से सबसे कठिन क्षेत्रों में भी बदलाव संभव है।
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